
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨खाकी पर दाग: ‘माननीय’ के पड़ोस में वसूली का खेल, पूरा थाना नपा🚨
- “रक्षक ही बने भक्षक! बंदरियाबाग में युवक को पकड़ा और थाने में कर डाला ‘ढाई लाख’ का सौदा।
- “लखनऊ ब्रेकिंग: गौतमपल्ली थाने पर पुलिस कमिश्नर का बड़ा चाबुक, भ्रष्टाचार की पुष्टि के बाद SHO पर गिरी गाज।
- “आधी रात को गिरफ्तारी, फिर ढाई लाख की ‘डील’—जानें कैसे लखनऊ के सबसे सुरक्षित थाने में खुला भ्रष्टाचार का खेल”।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती (उत्तर प्रदेश)
लखनऊ/बस्ती। सूबे की राजधानी लखनऊ का सबसे वीआईपी इलाका, जहाँ मुख्यमंत्री आवास से लेकर बड़े-बड़े हुक्मरानों की चौखट है, वहीं की पुलिस ने खाकी को शर्मसार कर दिया है। गौतमपल्ली थाने में भ्रष्टाचार के ‘दीमक’ ने ऐसी सेंध लगाई कि पुलिस कमिश्नर की जांच के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। ₹2.5 लाख की अवैध वसूली के गंभीर आरोप में थानेदार रत्नेश सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जबकि पूरे थाने के स्टाफ की भूमिका अब रडार पर है।
सत्ता की नाक के नीचे ‘उगाही’ का अड्डा
मामला महज दो दिन पुराना है। जानकारी के मुताबिक, बंदरियाबाग चौकी इंचार्ज रात के अंधेरे में एक युवक को पकड़कर थाने लाए थे। नियम-कानून की दुहाई देने वाली पुलिस ने उस युवक को डरा-धमकाकर करीब ₹2.5 लाख की मोटी रकम वसूल ली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि युवक की थाने में ‘आमद’ (जीडी एंट्री) तो दर्ज की गई, लेकिन उसे छोड़ने के बदले जो खेल पर्दे के पीछे खेला गया, उसने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में खुली पोल, गिली गाज
शिकायत जब पुलिस कमिश्नर (CP) तक पहुँची, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। शुक्रवार को आई जांच रिपोर्ट ने आरोपों की पुष्टि कर दी।
- थानेदार नपे: इंस्पेक्टर रत्नेश कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
- नई कमान: शासन ने आनन-फानन में विपिन सिंह को थाने की नई जिम्मेदारी सौंपी है।
- रडार पर स्टाफ: सिर्फ SHO ही नहीं, बल्कि थाने के दरोगाओं और सिपाहियों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस वसूली कांड में कई और ‘मछलियां’ फंस सकती हैं।
जीडी में एंट्री, फिर ‘डील’ और रिहाई
थाने के सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने कागजी खानापूर्ति तो पूरी की थी। युवक को थाने लाने की एंट्री डायरी में दर्ज थी, लेकिन पूछताछ के नाम पर जो ‘लेन-देन’ हुआ, उसने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया। सवाल यह उठता है कि जिस इलाके की सुरक्षा को लेकर सरकार सबसे ज्यादा गंभीर रहती है, वहाँ तैनात पुलिसकर्मी इतने बेखौफ कैसे हो गए कि ढाई लाख की डील कर ली?
बड़ी बात: मुख्यमंत्री आवास के ठीक बगल वाले थाने में हुई इस कार्रवाई ने संदेश साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार चाहे छोटे स्तर पर हो या बड़े, अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की तलवार से कोई बच नहीं पाएगा। फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से राजधानी के अन्य थानों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।




















